विजय ही विजय है

सोमवार, 24 दिसंबर 2007

अपनी मां भाजपा से बड़ा नहीं हूं: नरेंद्र मोदी


गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा को शानदार सफलता दिलाने वाले नरेंद्र मोदी ने पार्टी से खुद को बड़ा बताए जाने पर स्पष्टीकरण देते हुए आज कहा कि वह अपनी मां भाजपा से बड़े नहीं हैं। गुजरात विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के एक दिन बाद मोदी ने पार्टी से खुद को बड़ा बताने के लिए मीडिया को आड़े हाथ लिया। ऐसा करके उन्होंने अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को आश्वस्त करने की कोशिश की।

भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद मोदी ने अपने भाषण में कहा जो लोग यह कहते हैं कि मोदी पार्टी से बड़े हैं वे भाजपा और जनसंघ का इतिहास नहीं जानते। पुत्र कभी भी मां से बड़ा नहीं हो सकता। आरएसएस के पूर्व प्रचारक 57 वर्षीय मोदी खुद को संगठन से बड़ा बताए जाने के संबंध में मीडिया को आड़े हाथ लेते वक्त रुआंसे और भावुक हो गये। उन्होंने कहा कि यह कहना विकृत मानसकिता है कि मोदी पार्टी से बड़ा है। उन्होंने कहा कि जनसंघ के दिनों में पार्टी के उम्मीदवार ज्यादातर चुनावों में अपनी जमानत खो देते थे उस समय अनेक समर्पित कार्यकर्ताओं और परिवारों ने पार्टी की सेवा की।

मोदी ने कहा कि मेरी छवि इसलिए बड़ी लगती है क्योंकि आपका लेंस सीमित है जो मुझ पर आकर रुकता है, लेकिन अगर आप अपना फोकस बढ़ा लेंगे तो आप हजारों भाजपा कार्यकर्ताओं को देख सकेंगे जिन्होंने मुझे अपने कंधों पर उठाया है। उन्होंने कहा कि प्रमुख मीडिया का गुजरात चुनाव के नतीजों की ओर झुकाव नहीं है बल्कि वे सट्टा बाजार पर भरोसा करने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं।

ंनचनिर्वाचित विधायकों को पार्टी नेता एम. वेंकैया नायडू और अरुण जेटली की उपस्थिति में संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि लोगों ने हमें सिर्फ सत्ताा नहीं सौंपी है बल्कि जिम्मेदारी भी सौंपी है। उन्होंने कहा कि लोगों ने उनकी पार्टी की ओर से पिछले पांच साल में किए गए कार्यों पर विचार करने के बाद भाजपा को चुना। मोदी ने कहा कि यह पुनर्निर्वाचन इस बात का पर्याप्त संकेत है कि हम सही राह पर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार पहले की ही तरह कार्य करती रहेगी। इससे पहले नचनिर्वाचित भाजपा विधायकों ने सर्वसम्मति से नरेंद्र मोदी को यहां भाजपा विधायक दल का नेता चुना। स्रोत: प्रभासाक्षी ब्यूरो

रविवार, 23 दिसंबर 2007

गुजरात का जनादेश

गुजरात विधानसभा के लिए हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने साफ बहुमत हासिल कर लिया है। पार्टी को राज्य में 117 सीटें हासिल हुई हैं जो पिछली बार से 10 कम हैं। इसके बावजूद भाजपा ने गुजरात में धमाकेदार जीत दर्ज की है। हालांकि मतगणना से पहले हुए विभिन्न सर्वेक्षणों में पार्टी की जीत को तो तय माना जा रहा था लेकिन इतने बड़े अंतर से जीत होगी, यह किसी को नहीं लगा था। अलबत्ता, चुनाव नतीजों ने गुजरात में नरेंद्र मोदी की ताकत का अहसास करा दिया है।

गुजरात विधानसभा की 182 सीटों के लिए चुनाव हुए थे। इन सभी स्थानों के नतीजे आ गए हैं जिनमें से 117 भाजपा और 62 कांग्रेस के पक्ष में गए हैं। अन्य दलों और उम्मीदवारों को 3 स्थान मिले। प्रदेश विधानसभा में बहुमत हासिल करने के लिए 92 सीटों की जरूरत थी।

मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिनगर से 87 हजार से भी अधिक मतों से जीत दर्ज कर अपनी मजबूत स्थिति का अहसास करा दिया है। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री दिन्शा पटेल को शिकस्त दी। मोदी के मंत्रिमंडलीय सहयोगी रमनलाल वोहर (समाज कल्याण), वजुभाई वाला (वित्ता) तथा आनंदीबेन पटेल (शिक्षा) चुनाव जीत गए हैं। मोदी के नेतृत्व में पार्टी ने लगातार दूसरा विधानसभा चुनाव जीता है। स्रोत: प्रभासाक्षी ब्यूरो

27 दिसं को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे मोदी


अहमदाबाद (भाषा)। गुजरात विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने नरेन्द्र मोदी की रणनीति के सहारे शानदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बहुमत के साथ लगातार चौथी बार सत्ता पर कब्जा जमा लिया है। मोदी 27 दिसंबर को तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
182 सदस्यीय विधानसभा के मात्र आठ नतीजे आने शेष हैं और अब तक मिले परिणामों के अनुसार भाजपा ने 111 सीटों पर जीत हासिल की है। बहुत संभव है कि सदन में भाजपा दो तिहाई बहुमत से थोड़ा पीछे रह जाए। पिछले विधानसभा चुनाव में 127 सीट हासिल करने वाली भाजपा की इस जीत को 57 वर्षीय मुख्यमंत्री के करिश्माई व्यक्तित्व पर जनता की मोहर के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव प्रचार अभियान के दौरान नरेन्द्र मोदी की सरकार पर हमला बोलने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नतीजे आने के बाद मुख्यमंत्री से फोन पर बात की और उन्हें जीत की बधायी दी। नतीजों की पृष्ठभूमि में स्थिति का जायजा लेने के लिए भाजपा संसदीय बोर्ड की आज शाम दिल्ली में बैठक हो रही है।
27 दिसंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे मोदी ने मणिनगर में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और केन्द्रीय मंत्री दिनशा पटेल को 87 हजार मतों से मात दी है। मोदी ने पार्टी के बागियों को भी करारा जवाब दिया और सौराष्ट्र क्षेत्र की 63 में से 45 सीटें भाजपा के खाते में गयीं। दंगों के सबसे अधिक चपेट में आने वाले मध्य गुजरात में भाजपा कुछ सीटों पर कांग्रेस के हाथों शिकस्त खा बैठी लेकिन बाकी जगहों पर उसका प्रदर्शन शानदार रहा। पार्टी ने उत्तर और दक्षिणी गुजरात में कांग्रेस को पछाड़ दिया। चुनाव हारने वाले कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में पूर्व उप मुख्यमंत्री नरहरि अमीन (मतार) तथा भाजपा के बागी बेछार बदानी प्रमुख रहे। बदानी ने लाठी विधानसभा सीट पर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। मोदी मंत्रिमंडल के चुनाव जीतने वाले उम्मीदवारों में अशोक भट्ट आनंदीबेन पटेल तथा रमनलाल वोरा प्रमुख रहे। राकांपा के प्रदेश प्रमुख जयंत पटेल बोस्की भी सारसा से चुनाव जीतने में सफल रहे। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी की यह जीत एक निर्णायक मोड़ है और यह पार्टी की केन्द्र में वापसी का संकेत भी है।

गुजरात परिणाम केंद्र में भाजपा की वापसी का सबूत : आडवाणी

नयी दिल्ली (भाषा)। गुजरात विजय को केंद्र में पार्टी की वापसी का संकेत मानते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता और पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी ने आज अपने कार्यकर्ताओं से लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट जाने का आह्वान किया।

आडवाणी ने कहा कि गुजरात में भाजपा की जीत और हिमाचल प्रदेश में सुनिश्चित विजय (जिसके लिए मतगणना 28 दिसंबर को होगी) से मुझे पूरा विश्वास है कि हम वास्तव में साबित करेंगे कि भाजपा की वापसी हो रही है।आडवाणी ने एक बयान जारी कर कहा कि मौत का सौदागर और अन्य आरोप लगाकर नरेन्द्र मोदी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने की कोशिश की गयी जिसका गुजरात की जनता ने उचित जवाब दे दिया है। उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस नेतृत्व और अन्य दलों से अपील करता हूं कि कम से कम अब से वे भविष्य में इस तरह की राजनीति से तौबा कर लें। मुझे उम्मीद है कि वे आत्‍मनिरीक्षण करेंगे और गुजरात की पराजय से सही सबक सीखेंगे।

गुजरात में नकारात्मकता हारी: मोदी


अहमदाबाद: गुजरात परिणामों को नकारात्मकता की हार और सकारात्मकता की जीत बताते हुए मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से स्वर्णिम गुजरात बनाने के लिए सहयोग की अपील की।


चुनाव परिणामों की सभी अटकलों के मुंह के बल गिरने के बाद अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में मोदी ने अपनी जीत को 'जीतेगा गुजरात' मंत्र की जीत बताया और कहा, 'यह सकारात्मक वोट है। सरकार को दोबारा लाने का वोट है। अनेक नकारात्मक प्रचार किए गए नई तरकीबें अपनाई गईं। नए शब्दों के इस्तेमाल के बावजूद जनता ने नकारात्मकता को नकार दिया और सकारात्मकता के पक्ष में फैसला दिया।'


मोदी के चेहरे पर जीत की खुशी साफ झलक रही थी मोदी ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि गुजरात की जनता ने गुजरात विरोधी सभी ताकतों को परास्त कर दिया और 'जीतेगा गुजरात' मंत्र को बल दिया है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के 'चक दे गुजरात' चुनावी नारे के मुकाबले में बीजेपी ने 'जीतेगा गुजरात' नारा दिया था। तीसरी बार राज्य में मुख्यमंत्री बनने जा रहे मोदी ने मतदान से कुछ पहले उनके खिलाफ बगावत करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता केशुभाई पटेल द्वारा बधाई दिए जाने के बारे में पूछे जाने पर कहा - मैं एडवांस में ही सबको धन्यवाद कर चुका हूं। इस बारे में बार-बार पूछे जाने पर उन्होंने केशुभाई का नाम लिए बिना कहा -मैं सभी की बधाई लेता हूं। प्रधानमंत्री ने बधाई दी है। विभिन्न राजनीतिक दलों की बधाई मिली है।


संवाददाताओं को माध्यम बनाते हुए उन्होंने कहा कि आप भी बधाई देंगे तो मैं स्वीकार करूंगा लेकिन आप पीड़ित हैं तो अलग बात है। मोदी ने कहा कि 2010 गुजरात की स्थापना का स्वर्ण जयंती वर्ष है और इसे लेकर वह आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों गुजरात प्रेमी नागरिकों और देश विदेश में रहने वाले गुजरातियों से गुजरात को स्वर्णिम बनाने में सहयोग देने की अपील की।

मोदी: चाय बेचने से सीएम तक का सफर


छोटे से रेलवे स्टेशन पर कभी चाय बेचकर अपनी जिंदगी चलाने वाले भाजपा नेता नरेंद्र मोदी गुजरात की राजनीति में एक ऐसे क्षत्रप के रूप में उभरे हैं जो लगातार तीसरी बार राज्य का मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं जो एक रिकार्ड है।


मुख्यमंत्री के तौर पर 27 दिसंबर को पद और गोपनीयता की शपथ लेने जा रहे मोदी गोधरा कांड के बाद गुजरात में भड़के दंगों के दिनों से आज तक विपक्ष और अपने ही दल के कुछ छोटे बडे़ नेताओं की आलोचनाओं और विरोध का सामना करते आ रहे हैं। 57 वर्षीय इस नेता ने इस बार के चुनाव में सभी बाधाओं को पार करते हुए लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद अपने पास बनाए रखा।


गुजरात में आए भूकंप से मची तबाही और फिर तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के खिलाफ असंतोष उभरने पर तत्कालीन भाजपा महासचिव और पार्टी प्रवक्ता मोदी को प्राकृतिक और पार्टी के संकट से निपटने के लिए वहां मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दे कर भेजा गया। संकटमोचक बन कर पहुंचे मोदी ने छह अक्तूबर 2001 को पटेल की जगह गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। मुख्यमंत्री बनने के बाद मोदी ने कहा था कि वह गुजरात में एक दिवसीय मैच खेलने आए हैं लेकिन 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस अग्निकांड और उसके बाद राज्य में भड़के सांप्रदायिक दंगों ने पूरी तस्वीर ही बदल दी।

दोनों ही घटनाओं के बाद गुजरात की राजनीति का मुख्य बिंदु हिंदुत्व बन गया और मोदी उसकी केंद्रीय भूमिका में आ गए। आरएसएस के दुलारे रहे मोदी देखते ही देखते हिंदुत्व के पर्याय बन गए।


मोदी की जिंदगी का सफरनामा 17 सितंबर 1950 को मेहसाणा जिले के छोटे से वाडनगर शहर में एक निर्धन परिवार से शुरू हुआ। वह घांची समुदाय के हैं जो अन्य पिछड़ा वर्ग में आता है।


शुरू से ही दृढ़ इच्छा शक्ति रखने वाले मोदी वाडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने और बाद में अहमदाबाद में एक कैंटीन चलाकर संघर्ष करते हुए गुजरात में सत्ता के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचे हैं।
संघर्षो के बीच ही मोदी ने वाडनगर में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और आरएसएस प्रचारक रहते हुए 1980 के दशक में गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में एमए किया। उनमें नेतृत्व क्षमता छात्र जीवन से ही दिखने लगी थी जब वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेता के रूप में उभरे।


वर्ष 1987 में संघ से भाजपा में आने के बाद मोदी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई। एक वर्ष के भीतर ही उन्हें पार्टी की गुजरात इकाई का महासचिव बना दिया गया। 1995 में उन्हें भाजपा ने दिल्ली भेजा और वह राष्ट्रीय सचिव बनाए गए।


गुजरात दंगों के लिए भारी आलोचनाओं सामना करने के बावजूद उन्होंने गौरव यात्रा निकाल कर दिसंबर 2002 के विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से भाजपा की झोली में जीत डाली।


22 दिसंबर 2002 को मोदी को मुख्यमंत्री पद के दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ दिलाई गई। पहले कार्यकाल में उन्होंने जहां अपने हिंदुत्व की छवि को धार दी वहीं दूसरे कार्यकाल में वह विकास पुरुष के रूप में खुद को स्थापित करने में जुट गए।


पांच वर्ष के दूसरे कार्यकाल में मोदी ने जीवंत गुजरात का नारा दिया और बड़े पैमाने पर उद्योगपतियों तथा निवेशकों को गुजरात की ओर आकर्षित करने में सफल भी हुए। हालांकि राज्य के किसान आदिवासी और कुछ अन्य समुदाय उनकी नीतियों से नाराज भी नजर आए लेकिन एक बड़ा तबका राज्य का तेजी से औद्योगिक विकास होने के कारण खुश भी हुआ।

गुजरात में लहराया केसरिया -दैनिक जागरण


अहमदाबाद। गुजरात में आजादी के बाद से लड़ी गई सत्ता की अब तक की सबसे तीखी लड़ाई में अंतत: मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को जनता ने विजयश्री का वरण करा दिया। जनता की जय जय के साथ ही कांग्रेस को भी हारकर उनकी जयजय करनी पड़ी।

हालांकि भाजपा को सीटों का घाटा उठाना पड़ा लेकिन बहुमत के लिए जरूरी 92 के मुकाबले सीटों पर कब्जा कर लगातार तीसरी बार वह सरकार बनायेगी। विधानसभा की कुल 182 सीटों में से अब तक 106 सीटों पर कब्जा कर भाजपा ने भगवा गढ़ फतह करने के कांग्रेस के मंसूबों को धूल धूसरित कर दिया। संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में मोदी को चुनौती दे रही पार्टी को मुकाबला नजदीकी होने की उम्मीद थी और हर दौर के मतदान के बाद एक्जिट पोल के नतीजों से उसकी आशा बढ़ रही थी लेकिन अब तक उसे केवल 55 सीटें ही मिली हैं। अन्य मात्र 4 सीट जीतने में सफल रहे है।

वर्ष 2002 में गोधरा दंगों के बाद हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 127 तथा कांग्रेस ने 51 सीटें जीती थीं और इस बार भले ही कांग्रेस की सीटों में कुछ इजाफा हो रहा हो लेकिन दोनों दलों में जीत का अंतर काफी रहेगा।

गुजरात में मुख्यमंत्री पद की हैट्रिक के संकेत मिलने के साथ ही मोदी ने अपने अंदाज में प्रसन्नता जताते हुए कहा कि वह सीएम हैं और सीएम रहेंगे।

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने गुजरात में जबर्दस्त कामयाबी के बाद इन सुझावों को खारिज कर दिया कि मोदी को केंद्रीय राजनीति में लाया जाएगा और साफ तौर पर कहा कि लालकृष्ण आडवाणी पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने रहेंगे।

मोदी तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ 27 दिसंबर को लेंगे। मणिनगर से 87 हजार से भी अधिक मतों से जीत दर्ज कर अपनी मजबूत स्थिति का अहसास करा दिया है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री ढींढसा पटेल को शिकस्त दी है।
शुरूआती रुझानों के बीच ही नरेंद्र मोदी ने एसएमएस संदेश में कहा कि वह सीएम हैं और सीएम रहेंगे। उन्होंने सीएम का मतलब स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका अर्थ कामन मैन है।

मोदी के मंत्रिमंडलीय सहयोगी रमनलाल वोहरा वजुभाई वाला (वित्त) तथा आनंदीबेन पटेल (शिक्षा) चुनाव जीत गए हैं।

दिल्ली से मिली खबरों के अनुसार भाजपा मुख्यालय में जहां जश्न का माहौल है वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने घुटने टेकते हुए न केवल अपनी हार स्वीकार कर ली बल्कि मोदी को बधाई दी है।

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने चुनाव परिणामों को पार्टी की विचारधारा की जीत और मोदी के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम बताया वहीं भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि गुजरात चुनावों का राष्ट्रीय राजनीति पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से लोकसभा चुनावों की तैयारी में जुट जाने का भी आह्वान किया।
कांग्रेस ने गुजरात में अपनी पराजय पूरे नतीजे आने से पहले ही स्वीकार कर ली और उसके प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि नरेंद्र मोदी की महान विजय है यह उल्लेखनीय जीत है। उनकी जीत पर मुझे कोई ईर्ष्‍या नहीं है।